माँ कूष्मांडा की कथा – नवरात्रि के चौथे दिन की पूजा का महत्व

माँ कूष्मांडा का परिचय नवरात्रि में नवदुर्गा के आठ रूपों की पूजा की जाती है। इनमें चौथे दिन माँ कूष्मांडा की उपासना का विशेष महत्व है। “कूष्मांडा” नाम दो शब्दों से मिलकर बना है – कू (थोड़ा), उष्मा (ऊर्जा/तेज), और अंड (ब्रह्मांड/अंडाकार)। इस प्रकार माँ कूष्मांडा वह शक्ति हैं जिन्होंने अपनी दिव्य मुस्कान और अलौकिक … Read more

माता चंद्रघण्टा की कथा, महत्व और पूजा विधि

नवरात्रि के तीसरे दिन माँ दुर्गा के चंद्रघण्टा स्वरूप की पूजा की जाती है। माँ चंद्रघण्टा शांति, साहस, वीरता और धैर्य की प्रतीक हैं। उनका नाम ‘चंद्रघण्टा’ इसलिए पड़ा क्योंकि उनके मस्तक पर अर्धचंद्र के आकार की घण्टी शोभायमान रहती है। यह रूप भक्तों के लिए अद्भुत और अलौकिक है। कहा जाता है कि माँ … Read more

ब्रह्मचारिणी माता की कथा और महिमा

Introduction: नवरात्रि हिंदू धर्म का एक अत्यंत पावन पर्व है, जिसमें माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। इस श्रृंखला में दूसरे दिन भक्त माँ ब्रह्मचारिणी की आराधना करते हैं। माँ ब्रह्मचारिणी का स्वरूप अत्यंत शांत, तेजस्वी और दिव्य है। वे साधना, तपस्या और संयम की प्रतीक मानी जाती हैं। ब्रह्मचारिणी का … Read more

माँ शैलपुत्री की कथा | नवरात्रि के पहले दिन पूजा का महत्व और पूजन विधि

परिचय हिंदू धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व है। यह त्योहार साल में दो बार आता है – चैत्र और शारदीय नवरात्रि। इन नौ दिनों में माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि के पहले दिन माँ शैलपुत्री की उपासना की जाती है। शैलपुत्री यानी पर्वतराज हिमालय की पुत्री और भगवान … Read more

गणपति बप्पा मोरया क्यों कहा जाता है?

प्रस्तावना भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा में भगवान गणेश का विशेष स्थान है। उन्हें विघ्नहर्ता, मंगलमूर्ति और बुद्धि के देवता कहा जाता है। हर शुभ कार्य की शुरुआत उनके पूजन से होती है। महाराष्ट्र और देशभर में जब भी गणेशोत्सव मनाया जाता है, तब एक आवाज़ गूंजती है – “गणपति बप्पा मोरया”। यह नारा … Read more

महादेव की भक्त महादेवी अक्का – जीवन, भक्ति और वचन

आपने कृष्ण भक्त मीरा के बारे में तो सुना ही होगा, जो भगवान कृष्ण को अपना पति मानती थी। वैसे ही एक महादेव की भक्त थी। जिसे महादेवी अक्का के नाम से जाना जाता है। जो भगवान शिव का स्वरूप “चन्नमल्लिकार्जुन” (श्री शिव) को अपना पति मानती थी और उन्होंने उनकी भक्ति के लिए सभी … Read more

भगवान विष्णु का वामन अवतार – असुरराज बलि और धर्म की विजय

परिचय हिंदू धर्म में भगवान विष्णु को जगत के पालनहार और धर्म की रक्षा करने वाले देवता के रूप में जाना जाता है। जब-जब संसार में अधर्म, अन्याय और अहंकार का बढ़ना होता है, तब-तब भगवान विष्णु अवतार धारण करते हैं और धर्म की स्थापना करते हैं। विष्णु के दस प्रमुख अवतार (दशावतार) में पाँचवाँ … Read more

राजा महाबलि की कथा : ओणम पर्व का इतिहास और महत्व

राजा महाबलि की कथा : त्याग और भक्ति की अमर गाथा परिचय भारतीय पुराणों और कथाओं में अनेक महान राजाओं का वर्णन मिलता है। इनमें से राजा महाबलि (या बलि) को उनके त्याग, धर्मनिष्ठा और दानशीलता के लिए विशेष रूप से याद किया जाता है। विशेषकर केरल राज्य में ओणम पर्व के अवसर पर राजा … Read more

“ओणम उत्सव 2025: परंपराएँ, इतिहास और महत्व”

ओणम: केरल का सबसे बड़ा पर्व परिचय भारत विविधताओं की भूमि है और यहाँ हर राज्य के अपने पर्व और परंपराएँ हैं। दक्षिण भारत के केरल राज्य का सबसे प्रसिद्ध और भव्य त्यौहार ओणम (Onam) है। यह त्यौहार पूरे 10 दिनों तक मनाया जाता है और केरल की संस्कृति, कला और परंपराओं को जीवंत करता … Read more

पुसलार नयनार की कथा – भगवान शिव का अनोखा भक्त

हिंदू धर्म के इतिहास में 63 नयनार संतों का विशेष महत्व है। इन नयनारों ने अपने जीवन को भगवान शिव की भक्ति में समर्पित कर दिया। उन्हीं में से एक थे पुसलार नयनार (Pusalar Nayanar), जिनकी कथा बहुत अद्भुत और प्रेरणादायक है। पुसलार नयनार कौन थे? पुसलार नयनार तमिलनाडु के थिरुन्निन्रवूर गाँव में रहते थे। … Read more